संदेश

मई, 2020 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

राम की शक्ति पूजा । विश्लेषण ।

चित्र
पिछले समीक्षा में मैंने हिंदी साहित्य में लम्बी कविताओं के विकास के संदर्भ में अपनी बात रखी थी, तत्पश्चात उसी के साथ साथ मैं "असाध्य वीणा" के ऊपर भी चर्चा किया था । आज के इस पोस्ट में मैं बात करूँगा, हिंदी के सर्वाधिक चर्चित कवियों में से एक एवं हिंदी पट्टी के युवाओं के बीच खासा लोकप्रिय कवि सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' द्वारा रचित "राम की शक्ति पूजा" पर । इस पोस्ट में मैं प्रयास करूँगा कि अपनी बात "राम की शक्ति पूजा" के प्रथम 18 पंक्तियों तक सीमित रखकर इसे बहुत लंबा एवं उबाउं होने से बचा सकूँ । "राम की शक्ति पूजा" पर आने से पहले मैं आपसे निराला के बारे में थोड़ी सी जानकारी प्रेषित करने का प्रयास करता हूँ । 【 सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' का जन्म बंगाल की महिषादल रियासत (जिला मेदनीपुर ) में माघ शुक्ल ११, संवत् १९५५, तदनुसार २१ फ़रवरी, सन् १८९९ में हुआ था। वसंत पंचमी पर उनका जन्मदिन मनाने की परंपरा १९३० में प्रारंभ हुई। उनका जन्म मंगलवार को हुआ था। जन्म-कुण्डली बनाने वाले पंडित के कहने से उनका नाम सुर्जकुमार रखा गया। उनके पिता पं...

असाध्य वीणा

चित्र
नमस्कार मित्रों 🙏 मैं आपलोगों के साथ सचिदानंद हीरानन्द   वात्स्यायन 'अज्ञेय' द्वारा रचित लम्बी कविता असाध्य वीणा पर अपनी बात रखना चाहता हूँ । हिंदी साहित्य को जब हम देखते है तो सहज रूप से हमारे सामने उसके चार काल स्पष्ट रूप से दृष्टिगोचर होता है । हम काल विभाजन पर बात न करते हुए सीधे आधुनिक काल की बात पर आते है जिसका समय 1850 के बाद का हैं । आधुनिक हिंदी साहित्य में भारतेंदु युग में हिंदी साहित्य का अप्रत्याशित विस्तार एवं विकास देखने को मिलता है । लेकिन इस समय भी काव्य भाषा के तौर पर खड़ी बोली हिंदी वह स्थान न प्राप्त कर सकी जो  गद्य विधाओं ने प्राप्त किये । कुछ कवि जरूर इस भाषा मे कविता लिख रहे थे । लेकिन इसका सहज विकास द्विवेदी युग (आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी के नाम पर) में होता है । द्विवेदी युग में श्रीधर पाठक , मैथिलीशरण गुप्त व अन्य की रचनाओं में खड़ी बोली हिंदी काव्य भाषा के रूप में धीरे-धीरे परिमार्जित होकर कोमल होती जा रही, उसके बाद भी उसमें गद्यात्मकता विद्यमान हैं, और उसमें इस तरह की कोमलता देखने को नहीं मिलती जिस तरह तत्कालीन उर्दू साहित्य में हैं । इसके सा...