बालमन
बालमन बाल साहित्य के विकास में बाधक तत्व विशाल भारत देश में बाल साहित्य हमेशा विभिन्न समस्याओं से जूझता रहा है। प्रौढ़ साहित्य की तुलना में बाल साहित्य कम ही लिखा जा रहा है, क्योंकि इसकी पूछताछ करनेवालों, खोज खबर लेनेवालों की कमी हमेशा रही है। कोई बाल साहित्यकार यदि अपनी कोई कृति लेकर मुद्रण कराने की दृष्टि से किसी मुद्रक और प्रकाशक के पास जाता है तो वह भी उसे लौटा देता है। इसका कारण बाल साहित्य के पाठकों का अभाव है। यदि किसी पुस्तक की अधिक बिक्री की सम्भावना होती है, तो ही प्रकाशक उसे प्रकाशित करने को तैयार होते हैं। मुद्रण की समस्या भारत में मुद्रण कला का प्रारम्भ अठारहवीं शती के बाद प्रारम्भ हुआ है। प्रारम्भ होने पर भी लम्बे समय तक साफ सुथरे और आकर्षक मुद्रण का अभाव रहा है। बच्चे सुन्दर, रंग बिरंगे चित्रोंवाली पुस्तकों, पत्र-पत्रिकाओं को अधिक पसंद करते हैं। सामान्य कोटि की बाल साहित्य की पुस्तकों को बच्चे नहीं देखते। बच्चे चित्रोंवाली पुस्तकें ही अधिक उत्सुक होकर देखते हैं। भारत में मुद्रण सम्बन्धी समस्याओं के सम्बन्ध में हरिकृष्ण देवसरे ने इस प्रकार लिखा है- "भारत...