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सितंबर, 2020 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

राजर्षि पुरुषोत्तम दास टण्डन को मेरा ख़त

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आदरणीय पुरुषोत्तम दास टण्डन जी सादर प्रणाम                  हमलोग यहाँ कुशल हैं, आशा करता हूँ कि आप जहाँ भी होंगे कुशल होंगे । यह पत्र आपको एक बात बताने के लिए लिख रहा हूँ । आपने जो "बंदर सभा" नाम से जो कविता 'हिंदी प्रदीप' में लिखी थी, वह तो अपने अंग्रेजों के ख़िलाफ़ लिखी थी, लेकिन देखिये न अब आपका बंदर स्वदेशी हो गया है । मदारी का यह बंदर पता नहीं कब अपने मदारी के पास से भाग गया और अपनी एक फौज बना ली है । इस बंदरों के फौज का मुख्य काम जानते हैं । इनका काम है , सबको बंदर बनाने की कोशिश करना । दुःख की बात यह नहीं कि ये बंदर बना रहे, जिसको बनना है बने, लेकिन दुःख इससे होता है कि जो बंदर नहीं बनता उनको यह लोग दाँत काट लेते है । बताइये ऐसा कौन करता है ? आपका बंदर तो विदेशी था इसलिए यहाँ के लोगों का दुःख दर्द नहीं समझता था और उनके रक्त, माँस पर अपना अधिकार समझता था लेकिन देशी बंदर तो दिखावा करता है कि वह आपके दुःख को समझ रहा है, फिर भी रक्त और माँस की इसको आदत लग गई है । अब आप ही बताइये, हमलोग क्या करें ..?            ...

मुंशी प्रेमचंद को मेरा ख़त

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 आदरणीय प्रेमचंद जी सादर प्रणाम                   हमलोग यहाँ मस्त हैं, आशा करता हूँ आप भी जहाँ होंगे वहाँ सकुशल होंगे । जानते है, हमलोगों ने आज हिंदी दिवस मनाया । अरे ! आप नहीं जानते ? आज के दिन बहुत से लोगों ने अलग-अलग तरह से इसे मनाया । किसी ने अंग्रेजी में लम्बा लेख लिखकर हिंदी दिवस की हमें शुभकामनाएं भेजी, अब आप ही बताइये मैं भला क्या करता ? मैंने भी उनको सेम टू यू कह दिया । एक ने तो कहा कि हिंदी की दुर्गति का कारण हिंदी के लेखक लोग है । जानते है उन्होंने इसके पीछे कारण क्या बताया, बोले कि जब तक हिंदी के लेखक लोग बिना पैसा लिए लिखते रहेंगे, तबतक हिंदी का महत्व लोग नहीं समझेंगे । मतलब अब आप ही बताइये कभी आप  पैसा के लिए लिखे थे ? फिर जब आप पैसा के लिए नहीं लिखे तब भी आपको इतना पढ़ा जाता है । जबकि आपने तो लोगों की पीड़ा लिखा करते थे । आपको होरी, गोबर, हल्कू यहाँ तक कि झबरा की पीड़ा दिखती थी, लेकिन इनको अठन्नी भर के प्रेम कहानी के आगे कुछो नहीं दिखता । एक उपन्यास लिखे हैं वो शायद, लगता हैं ठीक ठाक बिकी नाही तो खिसियानी बिल्ली बन गए कि...

लकड़बग्घे के हाथ में शेर की सरकार

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   जंगल के जानवरों के बीच बहुत कौतूहल का माहौल हैं, सब के सब परेशान और चिंतित नज़र आ रहे हैं । सबके चेहरे पर एक ही चिंता दिख रही थी कि पता न आज क्या होगा ? आज जंगल मे लकड़बग्घों ने सभा बुलाई है । जिसमें आसपास के जंगलों से भी लकड़बग्घों को बुलाया गया है । सब आज मिलकर जंगल के सभी जानवरों के भविष्य का निर्धारण करने वाले है । जंगल का राजा शेर को अब लगता है कि जंगल के जानवर कर(टैक्स) देने में ज्यादा आनाकानी कर रहे थे, इसलिए पूरे जंगल का कर उगाही का काम लकड़बग्घों को दे दिया है । लकड़बग्घा सभी जानवरों से उगाही करेगा उसके बाद शेर के ख़ज़ाने में एक हिस्सा जमा करेगा, शेष हिस्सा अपने पास रखेगा । चूंकि उगाही के लिए लकड़बग्घों को कर्मचारी नियुक्त करने पड़ेंगे और उन कर्मचारियों को मोटी तनख्वाह भी देनी होगी अतः कर की रकम वह तय करेगा ताकि न ही सरकार को नुकसान हो न ही उसकी कम्पनी को ।               आसपास के सभी जंगलों से लकड़बग्घे झुंड के झुंड जंगल में आ रहे हैं । आज यह तय होगा कि किसको उगाही के लिए क्या रोल मिलता हैं, किसको किस स्तर पर उगाही का काम देखना है । कि...