क्या पश्चिमी ज्ञानोदय संकट में है? उत्तर-आधुनिकता से गांधी तक
प्रो. विश्वनाथ मिश्र से ‘अन्विति’ के पहले एपिसोड में हुई बातचीत के बहाने आधुनिकता, उत्तर-आधुनिकता, नारीवाद, बहुसंस्कृतिवाद, समुदायवाद और गांधी की वैकल्पिक सभ्यता-दृष्टि पर एक विचार जिस ज्ञानोदय ने आधुनिक मनुष्य को तर्क, विज्ञान, स्वतंत्रता, समानता, प्रगति और मानव-मुक्ति की भाषा दी, उसी आधुनिक दुनिया में उपनिवेशवाद कैसे पैदा हुआ? जिस विचार-परंपरा ने सार्वभौमिक मनुष्य की बात की, उस ‘मनुष्य’ में स्त्री कहाँ थी, उपनिवेशित समाज कहाँ थे और यूरोप से बाहर की सभ्यताओं के अनुभव कहाँ थे? और जो तर्क मनुष्य को रूढ़ियों और अंधविश्वासों से मुक्त करने निकला था, क्या वह धीरे-धीरे सत्ता, नियंत्रण, बाजार और प्रकृति के असीम दोहन का उपकरण भी बन गया? ये प्रश्न केवल दर्शन या राजनीति-विज्ञान की कक्षाओं तक सीमित नहीं हैं। जलवायु संकट, बढ़ती आर्थिक असमानता, युद्ध और हथियार, उपभोक्तावाद, एल्गोरिदम द्वारा निर्मित होती पसंद, पहचान की राजनीति और मनुष्य के बढ़ते अकेलेपन के बीच वे हमारे समय के अत्यंत व्यावहारिक प्रश्न बन चुके हैं। ‘साहित्य गंगा : भाषा, साहित्य और विचार’ की संवाद-शृंखला ‘अन्विति’ के पहले एपिसोड में इन...