वह तस्वीर मेरी माँ की थी

मैंने दुनियाभर की तमाम

सुंदरता को

जिस तस्वीर में देखा,

वह मेरी माँ की थी।


तस्वीर तब की,

जब माँ सोलह बरस की

अत्यंत तेज से भरी लड़की थीं,

जो उसी उम्र में

घर की बोझ उतारने के नाम पर

ब्याह दी गईं।


ससुराल में

ज़िम्मेदारी उठाने के

सिलसिले और हृदयभेदी

शब्दों के बीच उनका

कौमार्य ढहने लगा

और ख़्वाहिशों की खिड़की पर

परत जमने की शुरुआत हुई,

जिसने सोलह बरस की

उस लड़की को दफ़न कर

बीस बरस की औरत को गढ़ दिया।


औरत, अब माँ बनी।

माँ निज बचपन की देहरी को लाँघ

बच्चे को कलेजे से लगाकर

जीने लगी।


उसके हँसने से माँ की

दुनिया भी खुशियों से भर जाती।

उसके रोने पर

बेचैनी का आलम।


माँ चाहती थीं ये बच्ची

उनकी तरह न बने,

सिर्फ बेटी और बहू

के अलावा लोग उसे जानें

जैसे डॉक्टर, जज या कलेक्टर

के नाम से भी।


माँ आज पचास की होने को हैं।

आज माँ दुनिया की सबसे

मज़बूत स्त्री हैं,

और उनकी बच्ची का

बेटी के अलावा भी

कई परिचय हैं।


इस लिहाज़ से माँ अब

दुनिया की

सबसे सफल स्त्री भी हैं।


सबसे सुंदर से

सबसे मज़बूत और सफलता के

इस सफ़र में

सोलह बरस की वो

लड़की समय के

आगोश में कहीं विलीन हो गयी।

— @प्रियदर्शी गौतम 


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